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Showing posts from September, 2022

बागेश्वर धाम सरकार से जुड़े.. गुरुदेव श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज का मार्गदर्शन पाये.. जय श्री राम जय श्री बागेश्वर धाम सरकार

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  🌹❣️🌹❣️🌹❣️🌹❣️🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌹Om gurudevay namah 🌹 🌹Jay shri ram 🌹 🌹Jay shri bageshvar dham sarkar 🌹 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 बागेश्वर धाम सरकार हम सभी हिन्दू भाइयो के साथ सभी के लिये आस्था का विषय है, जहाँ हनुमान जी महाराज और सन्यासी बाबा की कृपा से सभी भक्तजनो की समस्याएं बताई जाती है.. बल्कि उनका समाधान भी किया जाता है ..अधिक जानकारी के लिये हमारे page को follow करे. . ❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️ ❣️Join my Whatsapp group  https://chat.whatsapp.com/KGJr760QQC80nmvQtHGZKr जय श्री राम  जय बजरंग बली महाराज  सत्य सनातन धर्म की जय हो... 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟 🌟   🌟 Subscribe my YouTube channel 👇  https://youtube.com/channel/UCmhWTrh4zEJjGNHCXVYh61g 🌟  ☀ ☀ ☀ ☀ ☀ ☀ ☀ ☀ ☀ ☀ ☀ ☀ ☀  Join telegram channel 👇  https://t.me/teambageshwardhamsarkar ☀  🔱 🔱 🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱🔱 🔱 Follow me on instagram 👇  https://instagram.com/team_...

रुद्राक्ष पहनने से पहले जान ले यह नियम तो होगी भोले बाबा की कृपा

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महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। रुद्राक्ष को बिना स्नान किए नहीं छूना चाहिए। स्नान करने के बाद शुद्ध करके ही इसे धारण करें। रुद्राक्ष धारण करते समय भगवान शिव का मनन करें।इ सके साथ ही शिव मंत्र 'ऊँ नम: शिवाय' का जाप क!रते रहें। रुद्राक्ष को हमेशा लाल या फिर पीले रंग के धागे में पहनना चाहिए। कभी भी इसे काले रंग के धागे में नहीं पहनना चाहिए। इससे अशुभ प्रभाव पड़ता है। रुद्राक्ष माला को आपने धारण कर लिया है तो अब इसे किसी और को बिल्कुल न दें। इसके साथ ही दूसरे की दी गई रुद्राक्ष को बिल्कुल धारण न करें। रुद्राक्ष की माला को हमेशा विषम संख्या में पहनना चाहिए। लेकिन 27 मनकों से कम नहीं होनी चाहिए। सोने के समय ना पहने रुद्राक्ष, रुद्राक्ष को कभी भी श्मशान घाट पर नहीं ले जाना चाहिए। इसके अलावा नवजात के जन्म के दौरान या जहां नवजात शिशु का जन्म होता है वहां भी रुद्राक्ष ले जाने से बचना चाहिए। जय श्री राम. विशाल पंडित

क्यो सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है?

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  श्री गणेशाय नमः.                     श्री राम              जय बजरंग बली सरकार प्रश्न -  भगवान गणेश को प्रथम पूज्य क्यो कहा जाता है? 1) शिव महापुराण की कथा के अनुसार जब भगवान शिव और गणेशजी के बीच युद्ध हुआ और गणेशजी का सिर कट गया तो देवी पार्वती के कहने पर शिवजी ने गणेश जी के शरीर पर हाथी का सिर जोड़ दिया। जब देवी पार्वती ने भगवान शिव से कहा कि इस रूप में मेरे पुत्र की पूजा कौन करेगा। तब शिवजी ने वरदान दिया कि सभी देवी-देवताओं की पूजा और हर मांगलिक काम से पहले गणेश की पूजा की जाएगी। इनके बिना हर पूजा और काम अधूरा माना जाएगा। 2) जब देवताओ में प्रथम पूज्य के विवाद को लेकर बहस हुई, तो सभी देवता भूतभावन बाबा महादेव के पास पहुचे और न्याय करने को कहा, तो भोले बाबा ने प्रतियोगिता करबाई.. कहा जो जीतेगा वही प्रथम पूज्य होगा.. तो प्रतियोगिता कुछ इस प्रकार थी एक बार देवताओ में प्रतियोगिता हुई कि कौन सबसे प...

भगवान परशुराम ने क्यो काटा अपनी ही माता का सिर और क्यो किया 21 बार धरती को क्षत्रिय विहीन

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  आखिर क्या कारण था कि भगवान परशुराम ने अपनी माता का ही सिर काट दिया, और क्रोधित होकर 21 बार सम्पूर्ण धरती को क्षत्रिय विहीन करने की सौगंध खाई l परशुराम भगवान  ऋचीक-सत्यवती के पुत्र जमदग्नि, जमदग्नि-रेणुका के पुत्र परशुराम थे। ऋचीक की पत्नी सत्यवती राजा गाधि (प्रसेनजित) की पुत्री और विश्वमित्र (ऋषि विश्वामित्र) की बहिन थी। परशुराम सहित जमदग्नि के 5 पुत्र थे।   चारो युग में परशुराम : सतयुग में जब एक बार गणेशजी ने परशुराम को शिव दर्शन से रोक लिया तो, रुष्ट परशुराम ने उन पर परशु प्रहार कर दिया, जिससे गणेश का एक दांत नष्ट हो गया और वे एकदंत कहलाए। त्रेतायुग में  जनक, दशरथ आदि राजाओं का उन्होंने समुचित सम्मान किया। सीता स्वयंवर में श्रीराम का अभिनंदन किया।   द्वापर में उन्होंने कौरव-सभा में कृष्ण का समर्थन किया और इससे पहले उन्होंने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र उपलब्ध करवाया था। द्वापर में उन्होंने ही असत्य वाचन करने के दंड स्वरूप कर्ण को सारी विद्या विस्मृत हो जाने का श्राप दिया था। उन्होंने भीष्म, द्रोण व कर्ण को शस्त्र विद्या प्रदान की थी। इस तरह परशुराम के अनेक...