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Showing posts from November, 2022

भगवान विष्णु का प्रथम अवतार - मतस्य अवतार

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मत्स्य अवतार अवतार भगवान विष्णु के दस अवतारों में प्रथम अवतार धर्म-संप्रदाय हिंदू धर्म प्राकृतिक स्वरूप मत्स्य (मछली) शत्रु-संहार दैत्य 'हयग्रीव' संदर्भ ग्रंथ मत्स्य पुराण संबंधित लेख सत्यव्रत जयंती चैत्र में शुक्ल पक्ष की तृतीया मत्स्य अवतार भगवान विष्णु के प्रथम अवतार है। मछली के रूप में अवतार लेकर भगवान विष्णु ने एक ऋषि को सब प्रकार के जीव-जन्तु एकत्रित करने के लिये कहा और पृथ्वी जब जल में डूब रही थी, तब मत्स्य अवतार में भगवान ने उस ऋषि की नाव की रक्षा की। इसके पश्चात् ब्रह्मा ने पुनः जीवन का निर्माण किया। एक दूसरी मन्यता के अनुसार एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर सागर की अथाह गहराई में छुपा दिया, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को प्राप्त किया और उन्हें पुनः स्थापित किया। मत्स्य अवतार की कथा एक बार ब्रह्माजी की असावधानी के कारण एक बहुत बड़े दैत्य ने वेदों को चुरा लिया। उस दैत्य का नाम 'हयग्रीव' था। वेदों को चुरा लिए जाने के कारण ज्ञान लुप्त हो गया। चारों ओर अज्ञानता का अंधकार फैल गया और पाप तथा अधर्म का बोलबाला हो गया। तब भगवान विष्णु ने धर्म की रक्षा ...

भगवान नरसिंह अवतार

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  भगवान विष्णु का नर सिंह अवतार  पौराणिक कथा के अनुसार, भाई हिरण्याक्ष का वध होने से हिरण्यकश्यप देवताओं से नाराज हो गया था और वह भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानने लगा था। उसने विजय प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया। उसे वरदान प्राप्तथा कि कोई नर या पशु मार नहीं सकता है। उसे घर या बाहर, जमीन या आसमान में नहीं मारा जा सकता है। उसे शस्त्र या अस्त्र से, दिन या रात में नहीं मारा जा सकता है। इस वरदान के कारण वह स्वयं को भगवान समझने लगा था। उसने तीनों लोकों पर अत्याचार शुरू कर दिया।उसका आतंक इतना बढ़ गया कि देवता भी उससे भय खाने लगे थे। सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से इस संकट से उबारने के लिए प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप के अत्याचार से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का भक्त था। वह असुरों के बच्चों को भगवान विष्णु की भक्ति के लिए प्रेरित करता था। जब इस बात की जानकारी हिरण्यकश्यप को चली तो उसने अपने बेटे से भगवान विष्णु की भक्ति को छोड़ने के लिए कहा। प्रह्लाद के मना करने पर वह नाराज हो गया और उसने अपने बेटे को कई यातना...

भगवान विष्णु का वराह अवतार

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  हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती का पर्व मनाया जाता है। भगवान विष्णु ने इस दिन वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष नामक दैत्य का वध किया था। वराह जयन्ती के अवसर पर भक्त लोग भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन, उपवास एवं व्रत इत्यादि का पालन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते है l भगवान विष्णु ने कुल 24 अवतार लिए हैं। मत्स्य और कश्यप के बाद तीसरा अवतार है वराह। वराह यानी शुकर। इस अवतार के माध्यम से मानव शरीर के साथ परमात्मा का पहला कदम धरती पर पड़ा। मुख शुकर का था, लेकिन शरीर इंसानी था। उस समय हिरण्याक्ष नामक दैत्य ने अपनी शक्ति से स्वर्ग पर कब्जा कर पूरी पृथ्वी को अपने अधीन कर लिया था l पुरातन समय में दैत्य हिरण्याक्ष ने जब पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया तब ब्रह्मा की नाक से भगवान विष्णु वराह रूप में प्रकट हुए। भगवान विष्णु के इस रूप को देखकर सभी देवताओं व ऋषि-मुनियों ने उनकी स्तुति की। सबके आग्रह पर भगवान वराह ने पृथ्वी को ढूंढना प्रारंभ किया। अपनी थूथनी की सहायता से उन्होंने पृथ्वी का पता लगा लिया और समुद्र के अंदर जाकर अपने दांतों प...